कैसा आस्चर्य है हम उसी को ढूढ़ रहे है जो हमारे सब से करीब है , हम उसी को प्राप्त करने में असमर्थ है जो हमें पहले से ही प्राप्त है.हम उसी के नहीं हो सके जो हमेसा से हमारा है. वह करीब है, हम दूर है. वह तो सदैव उपलब्ध है हम ही उपलब्ध नहीं है. हमेसा ब्यस्त रहते …
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Mere Dil Se Blog